भारत देश दुनिया की सबसे प्राचीन, अनूठी, आश्चर्यजनक, संस्कृति और सभ्यता का अनोखा मिश्रण है. भारत मे एक ऐसा मंदिर है, जिसने भी इसके बारे मे सुना उसे यकीन ही नही हुआ कि इतनी अनूठी शिल्पकला का बेजोड़ नमूना उन्हें भारत मे देखने को मिलेगा. इस मंदिर को जिसने भी एक बार देखा वो इसकी ख़ूबसूरती को कभी नही भूल पाता. भारतीयों के अलावा दुनिया भर के पर्यटक इसकी एक झलक देखने के लिए विदेशों से यहाँ आतें हैं .
तकरीबन एक हजार साल पुराना मंदिर दुनिया की सबसे प्राचीन एतिहासिक उपलब्धि है, इस प्रकार की शिल्पकला वाला ये एक मंदिर है जो सिर्फ भारत की भूमि पर निर्मित है. इसके जैसा कोई रमणीक स्थल न कोई था और ना कभी आगे भविष्य मे होने की संम्भावना है. इस मंदिर की खोज ब्रिटिश काल मे ब्रिटिश इंजीनियर टी. एस. बर्ट ने की थी. इस मंदिर को देख कर वो एकदम आश्चर्यचकित रह गया था, जबकि इस मंदिर की चर्चा ने पूरे यूरोप को एक समय के लिए सन्न कर दिया था कि ऐसी भी कोई जगह भारत मे हो सकती है .
भारत मे स्थित जब यह मंदिर दुनिया के सामने आया तो सारी दुनिया इससे इतनी प्रभावित हुई कि, उसने इस अनमोल और आश्चर्यजनक मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा अपने कन्धों पर ले लिया. यानि कि इस मंदिर की खोज के बाद इसे यूनेस्को ने 1986 मे इसे विश्व विरासत की सूची मे शामिल किया . इसका मतलब ये हुआ कि, अब सारा विश्व इसकी मरम्मत और देखभाल के लिए उत्तरदायी होगा .
यह है भारत के मध्य प्रदेश मे छिंदवाडा के पास स्थित खजुराहो का मंदिर. यह मंदिर पत्थरों पर उकेरी गई अनूठी शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ बहुत सारे प्राचीन और मध्यकालीन मंदिर है, जिनमे बड़ी संख्या मे हिन्दू और जैन मंदिर हैं. मंदिरों का शहर खजुराहो पूरे विश्व मे मुड़े हुए पत्थरों पर निर्मित मंदिरों के लिए प्रसिद्द है. खजुराहो को इसके अलंकृत मंदिरों की वज़ह से जाना जाता है जो कि देश के सर्वोत्कृष्ट मध्यकालीन स्मारक हैं .
दरअसल शिल्पकला के माध्यम से मंदिर की दीवारों पर सम्भोग की विभिन्न कलाओं को इन मंदिरों मे बेहद ख़ूबसूरती के साथ उभारा गया है, जो विश्व मे और कही नही है. खजुराहो का इतिहास लगभग एक हज़ार साल पुराना है. यह शहर चंदेल साम्राज्य की प्रथम राजधानी था. चंदेल वंश और खजुराहो के संस्थापक चन्द्र वर्मन थे. खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 950 ईसवीं से 1050 ईसवीं के बीच इन्ही चंदेल राजाओं द्वारा किया गया .
इस परिसर के विशाल मंदिरों की बहुत सजावट की गई है. ये सजावट यहाँ के शासकों की संम्पन्नता और शक्ति को प्रकट करती है. इतिहासकारों का मत है कि इसमे हिन्दू देवकुलों के प्रति भक्तिभाव दर्शाया गया है. खजुराहो के मंदिर पूरी दुनिया का गौरव है और भारत की संम्पन्नता और कलाकारी के प्रतीक हैं .
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