रघुराम राजन ने अपना कार्य बहुत ही कुशलता के साथ किया राजन के कार्यकाल मे भारत की इकोनोमी स्थिर रही इसमे कोई ज्यादा उतार चढ़ाव नही देखा गया , राजन के कार्यकाल मे ब्याज दर भी स्थिर रही . राजन ने ये बयान कई बार दिया कि भारत की जनता का हित देखना उनके लिए सर्वोपरि है, और वो जनता के हितों को लेकर गंभीर हैं राजन की प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों के साथ कुछ मतभेद जरूर था, परन्तु खुलकर किसी ने भी कुछ नही कहा.
राजन का कार्यकाल 4 सितम्बर को ख़त्म हो रहा है और राजन ने पहले ही कह दिया था कि, वो अपने कार्यकाल के ख़त्म होने के बाद दूसरी पारी के लिए तैयार नही है जिसकी वज़ह से 24 वें गवर्नर की रेस के लिए बहुत से नामो की कतार लगी हुई थी , इनमे सबसे प्रमुख नाम अरविन्द पनगडिया का था उसके बाद गोकरनके नाम की भी चर्चा हुई, लेकिन अचानक उर्जित पटेल के नाम का एलान नये आर बी आई गवर्नर के लिए कर दिया गया .उर्जित पटेल का नाम अचानक सामने आने से सबको हैरानी भी हुई है
उर्जित पटेल ने याले से पीएचडी की हुई है , पटेल राजन के करीबी भी माने जाते हैं ऐसा भी कहा जाता है कि पटेल राजन के रास्ते पर चलते हुए उन्ही की नीतियों को आगे बढ़ाएंगे , लेकिन राजन की राय वर्तमान सरकार की बनायी गई नीतियों से इत्तेफाक नही रखती थी , इस कारण स्वामी ने राजन के बारे मे कुछ कहा था जिससे आहत होकर राजन ने अपने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी थी .पिछले हफ्ते वित्तमंत्री अरुण जेटली और प्रधानमंत्री ने एक मीटिंग के बाद उर्जित पटेल के नाम की घोषणा नये आर बी आई गवर्नर के लिए कर दी .
उर्जित पटेल मुकेश अम्बानी के जीजा जी भी लगते है , अम्बानी , मोदी और पटेल ये तीनों मिलकर देश को अवश्य ही नई ऊंचाई पर पहुंचा देंगेक्योंकि पटेल गवर्नर पद के प्रमुख दावेदार अरविन्द पनगडिया को पीछे छोड़ कर यहाँ तक पहुचें हैं . मुकेश अम्बानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्री के शेयरों मेपिछले कुछ सालों से कोई हलचल देखने को नही मिली है तो अब लगता है कि अब रिलांयस के शेयरों के दौड़ने का समय आ गया है क्योंकि मोदी भी मुकेश अम्बानी के करीबी माने जाते हैं .
उर्जित पटेल के नाम को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है ,क्योंकि उर्जित का नाम अचानक सामने आने से लोग इसको राजनेताओं के व्यक्तिगत लाभ को लेकर भी देख रहें हैं .लेकिन अब तो औपचारिक रूप से पटेल के नाम की घोषणा विगत शनिवार को हो चुकी है , आगे परिस्थितियां कैसी होती है ये मौसम और चुनाव पर भी निर्भर करेगी . लेकिन उम्मीद है कि बैंकों के विलय और नये गवर्नर का चयन और आने वाले साल का बजट. ये हालात निश्चय ही भारत की इकोनॉमी को बढाने में सहायक होंगे .
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